कोरोना के डर से साफ़ हुई हवा
कोरोना LOCKDOWN का आज आठवां दिन है प्रकर्ति ने हम मनुष्यों को अपनी हद में रहने के दिशा निर्देश देते हुए भविष्य के लिए भी अपनी तथाकथित विकास गति की दिशा बदलने के लिए सोचने पर विवश किया है यह आधुनिक मानव सभ्यता के लिए बहुत बड़ी शिक्षा है !
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आज फिर वही दिनचर्या व्याम के साथ शुरुआत की कुछ देर SOCIAL MEDIA देखने के बाद स्नान करके वेब वर्ल्ड,डिजिटल इत्यादि जानकारी हासिल की गई ! कोई भी इंसान गली में बाहर नहीं नजर आ रहा सिर्फ सब्जी वाले हॉकर ही सब्जी बेच करके लोगों की मदद कर रहे हैं ! लगभग सात बजे शाम को कुछ रेजिडेंट सोशल डिस्टन्सिंग में रहते हुए बात करने लगे और ये महसूस करने लगे की इस वक़्त हमको अपने घरोँ में ही रहना सच्ची देश भक्ति व् सम्पूर्ण मानवता के लिए कल्याणकारी होगा ! आसमान के तरफ देखते हुए मन को सुख का अहसास होता है क्योंकि प्रदूषण बिलकुल भी नहीं है और आकाश बिलकुल नीला है !
हमारे ही कुछ लोग आज खाने की चीजों के अभाव में पीड़ित हैं सरकार एवं सामजिक संस्थाएं आगे बढ़कर लोगों की मदद तो कर रही हैं मगर ये लम्बी लड़ाई है ! बच्चों की पढ़ाई यूट्यूब पर आकर शिक्षक करवाने लगे हैं ! प्रक्रति ने हम सब के लिए ये एक मौका दिया है की हम एक बार सकारत्मक मन से सोचें और जो गलतियां हमने की हैं उनका पुनरावलोकन अवश्य करें अन्यथा दिन ये मानव सभ्यता ख़त्म हो जाएगी !
आपका अपना // जगबीर सिंह फुलिया


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